Friday, 31 January 2020

किशोर दा


राज़ हेयर ड्रेसर की कैंचियाँ संगीत की लय के साथ थिरकती हुईं बहुत शानदार रही थीं। रेडियो पर एक के बाद एक किशोर दा के गीत सुनाये जा रहे थे। जुनैद और दिनेश दोनों एक-एक अन्तरे का आनन्द ले रहे थे।

"फिर क्यों संसार की बातों से,
भीग गये तेरे नैना... कुछ तो लोग कहेंगे।

आहा...

"तेरी नज़र, बन के ज़ुबाँ, लेकिन तेरे पैग़ाम दिए जाये..
ये शाम मस्तानी, मदहोश किये जाय..."

क्या खूब...

इतने में रेडियो पर "आज के मुख्य समाचार" सुनाये जाने लगे। देश में फैल रहे द्वेष को लेकर मंत्री जी की चिंता का बयान सुनते ही जुनैद भड़क उठा। "सब इन्ही का तो किया धरा है", जुनैद बड़बड़ाया।

"सरकार जो कर रही है ठीक कर रही है। सत्तर साल से जो नहीं हुआ और जो सैंतालीस में हो जाना चाहिये था, वो आज हो रहा है", दिनेश बोला।

जुनैद भड़क गया - "तुम्हारी एक नहीं चलेगी। हिंदुस्तान किसी के बाप का नहीं"।

"बिल्कुल हमारे बाप दादाओं का है हिन्दुस्तान। ये हमारी मिट्टी है जिसे हम बर्बाद नहीं होने देंगे", दिनेश लगभग चिल्लाते हुए बोला।

रेडियो एंकर की मधुर आवाज में अगली उद्घोषणा हुई...
"आइये सुनते हैं अगला नगमा, किशोर कुमार की आवाज़ में। गीत लिखा है मजरूह सुल्तानपुरी ने और इसे संगीतबद्ध भी किशोर कुमार ने ही किया है। गीत के बोल..."कोई हमदम ना रहा..."

जुनैद और दिनेश फिर से गीतों में खो गये। कैंचियाँ फिर से सुरबद्ध लगने लगीं।

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