मेरा नाम इतना भी कॉमन नहीं है कि किसी और की जगह मुझे ईमेल आ जाए। फिर दफ्तर में हमारा इंटरेक्शन भी अब उतना नहीं था।
उस दिन अचानक जब उसका ईमेल आया तो मैं चौंक गया। बहुत सारे नामों की फेहरिस्त के अंत में था मेरा नाम। जैसे जान बूझ के लिखा हो, और बाद में हटाना भूल गई हो। मेरा नाम उसके आउटलुक की कैश में इतने साल बाद भी मौजूद है।
किसी के सवाल के जवाब में उसने लिखा था, "आय विल गेट बैक टू यू"।