पिछले हफ़्ते जब BMC की गाड़ी आकर अन्ना के ठेले का सारा सामान उठा कर ले जा रही थी, तब अन्ना का गला भर आया था। पिछले तीन बरस में जिसे हमेशा मुस्कुराते देखा हो, उसे उदास देखना आसान नहीं था।
अन्ना के यहाँ चाय पीने का लुत्फ़ अपना ही है। दफ़्तर के कैफेटेरिया में उपलब्ध बकबकी सी चाय से कहीं बेहतर होती है अन्ना की केतली की गर्म चाय।
अन्ना का ठेला भी कोई आम ठेला नहीं है। अन्ना का ठेला दरअस्ल एक स्कूटर है जिस की पिछली सीट पर चाय का बड़ा डिब्बा धरा रहता है।
हम मित्रों ने अन्ना की कमाई के कईं कयास लगाए। बहुत कमाई होगी अन्ना की। इन चर्चाओं का मुख्य आधार अन्ना के ठेले से कुछ दूरी पर खड़ी कार है, जिसे अन्ना एक स्टोर की तरह इस्तेमाल करते हैं। इस कार में अन्ना कंफेक्शनरी का बड़ा जखीरा रखते हैं।
कमीज़ के खुले बटन, घुंगराले बाल, मूछें और मुस्कान अन्ना की पहचान हैं। इलाके के सभी लफ़ंडर चाय पीने यहीं आते है।
कुछ इंटेलेक्चुअल किस्म के लोग अन्ना के ठेले के विरोधी भी हैं क्यों कि ठेला गैर कानूनी है। लेकिन बरसों से चला यह रोज़गार उनके घर चलाने का एक मात्र ज़रिया है। हर मौसम में उपलब्ध पेट भरने का जुगाड़ दरअस्ल गरीबों के लिये भी एक वरदान जैसा है।
आज ऑटो से उतरते ही कान में अन्ना की आवाज़ पड़ी। दूर से इशारा करके बुलाया। आज अन्ना की बेटी का जन्मदिन है। सभी को बुला बुला कर मुफ़्त समोसा खिला रहे हैं। इसे आप मार्केटिंग स्ट्रेटेजी का नाम भी दे सकते हैं। मेरे लिये यह उनकी रिश्ते निभाने की एक कोशिश है। समोसा गर्म भी है और स्वादिष्ट भी। उस दिन, जब BMC की गाड़ी उनका सारा सामान उठा ले गयी थी, तब भी इतना नुकसान नहीं हुआ होगा जितना आज वो समोसों में खर्च कर रहे हैं। बड़ी बात यह कि समोसे खुद नहीं बना रहे, एक पड़ोस की दुकान से आर्डर किये हैं, ताकि वो सब से बात कर सकें।
आज अन्ना की मुस्कान रोज़ से दोगुनी है।
किसी ने सत्य कहा है कि '#ज़िन्दगी_ज़िंदादिली_का_नाम_है'।
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